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महात्मा गांधी पर 10 लाइन | 10 Lines on Mahatma Gandhi in Hindi | 2 October Gandhi Jayanti par 10 Line

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महात्मा गांधी पर 10 लाइन 1. महात्मा गांधी भारत के महान नेताओं में से एक थे।  2. महात्मा गांधी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 ई॰ में गुजरात के पोरबंदर नामक स्थान पर हुआ था।  3. महात्मा गांधी जी का पूरा नाम मोहनदास कर्मचंद गांधी था‌‌।  4. महात्मा गांधी जी के पिता का नाम कर्मचंद गांधी और माता का नाम पुतलीबाई था और वह धार्मिक प्रवृत्ति की स्त्री थी।  5. महात्मा गांधी का विवाह 1883 ई॰ में 13 वर्ष की आयु में कस्तूरबा बाई  के साथ हुआ। 6. महात्मा गांधी जी सत्य व अहिंसा के पुजारी थे । महात्मा गांधी सत्य को ही ईश्वर मानते थे। 7. भारत में प्रारम्भिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्हें वकालत के लिए इंग्लैंड भेजा गया । 8. वे अन्याय और अत्याचार के सामने कभी नहीं झुके । 9. भारतवासी उन्हें श्रद्धा से ‘राष्ट्रपिता’ और प्यार से ‘बापू’ कहते हैं। 10. 30 जनवरी 1948 को प्रार्थना सभा में नाथूराम गोडसे ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी। WATCH VIDEO Click Here to Download PPT

हिंदी दिवस पर निबंध | Hindi Diwas 14 September par Nibandh | Essay on Hindi Day in Hindi | 2021

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  हिंदी दिवस पर निबंध भूमिका हर देश की अपनी भाषा होती है। भाषा के माध्यम से ही  हम एक-दूसरे के विचारों को समझ सकते हैं। भारत देश में वैसे तो अलग-अलग राज्यों में अलग-अलग भाषाएँ बोली जाती है पर “ हिंदी ” हमारे देश की अपनी और प्यारी भाषा है। हिंदी एक ऐसी भाषा है, जिसके विकास के लिए हिंदी भाषी “ हिंदी दिवस ” मनाते हैं। हिंदी भारत की राजभाषा है। राजभाषा का अर्थ राजभाषा का अर्थ होता है - राजकाज की भाषा । अर्थात जिस भाषा का प्रयोग देश के कार्यालयों में राज - काज के लिए किया जाता है, उसे राजभाषा कहते हैं। 14 सितंबर 1949 को हिंदी भाषा को संविधान में संघ की राजभाषा का दर्जा मिला था। प्रत्येक वर्ष 14 सितंबर को ‘हिंदी दिवस’ के रुप में मनाते हैं। संपर्क भाषा हिंदी अब सारे भारत की संपर्क भाषा बन गई है। विश्व की संपर्क भाषा अंग्रेजी है। हिंदी भाषा की लिपि देवनागरी है। देवनागरी लिपि बाएँ से दाएँ लिखी जाती है। अधिकांश लिपियाँ बाएँ से दाएँ लिखी जाती है, पर फारसी लिपि दाएँ से बाएँ लिखी जाती है। हिंदी की अनेक उप भाषाएँ और बोलियां है। बंगाल, उड़ीसा, आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात, पंजाब आदि राज्...

समय का सदुपयोग पर अनुच्छेद | Paragraph on Proper Utilization of Time in Hindi | Samay Ka Sadupyog par Anuched Hindi me

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समय का सदुपयोग पर अनुच्छेद कहा गया है “समय किसी की प्रतीक्षा नहीं करता।" यह कालचक्र है। इसकी गति कभी नहीं धमती है। समय आता है और चला जाता है। समय वह धन है जिसका सदुपयोग न करने से वह व्यर्थ चला जाता है। समय का सदुपयोग करने वाले को सभी सुखों की प्राप्ति होती है। समय के सदुपयोग से मनुष्य धनवान, बुद्धिमान तथा बलवान हो सकता है। समय के दुरुपयोग से दुख और दरिद्रता ही हाथ लगते है।प्रत्येक व्यक्ति के जीवन में भाग्योदय के क्षण आते हैं, जो उस समय का सदुपयोग कर लेता है, वह जीवन में सफलता की सीढ़ियाँ चढ़ता चला जाता है। थोड़ा - सा आलस्य बहुत घातक सिद्ध होता है। लखपति व्यापारी समय से चूक जाने से  भिखारी बन सकता है। परीक्षा में थोड़ी देर से पहुँचने पर छात्र परीक्षा से हाथ धो बैठता है।  अतः प्रत्येक विद्यार्थी को अपने कीमती समय का अच्छे कार्य में उपयोग करना चाहिए। जीवन में वही व्यक्ति सफल होते हैं, जो समय का सदुपयोग करते हैं। WATCH VIDEO  Click Here to Download PPT समय का सदुपयोग पर 10 लाइन | 10 Lines on Samay Ka Sadupyog समय का महत्व 10 पर लाइन | 10 Lines on Importance of Time in Hindi

सच्चा मित्र पर 10 लाइन | 10 lines on True Friend in Hindi | सच्चा मित्र पर 10 वाक्य/पंक्तियां | 2021

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सच्चा मित्र  पर 10 लाइन सच्चा मित्र एक अनमोल रत्न है।  सच्चा मित्र वही है जो विपत्ति के समय आप के काम आता है। ऐसा मित्र स्वार्थी नहीं होता।  सच्चे मित्र को आपकी धन-संपत्ति से कोई मोह नहीं होता।  सच्चा मित्र मनुष्य की सोई किस्मत को जगा सकता है।  सच्चा मित्र भटके को सही राह दिखा सकता है। सच्चा मित्र जीवन की कड़ी धूप में शीतल छाँव की भाँति होता  है।  सच्चे मित्र में प्रेम व त्याग की भावना होती है।  एक सच्चा मित्र आपको ऊँचाई तक पहुँचा सकता है।  कपटी मित्र अपने स्वार्थ के लिए आपको पतन के रास्ते पर पहुँचा सकता है।  सच्चा मित्र अपने मित्र की कमजोरी को किसी के सामने उल्लेख नहीं करता, बल्कि उसके गुणों की तारीफ़ करता है।  अतः मित्र का चुनाव बहुत सोच समझकर कर करना चाहिए। WATCH VIDEO  Click Here to Download PPT 

मातृभूमि पर 10 लाइन | 10 Lines on My Motherland in Hindi | 2021

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  मातृभूमि पर 10 लाइन हर मानव अपनी मातृभूमि से अत्यधिक प्यार करता है और उसे माँ का दर्जा देता है। हमारी मातृभूमि और माँ हमारे लिए स्वर्ग से भी बढ़कर है। इसने हमें जन्म दिया और इसकी मिट्टी में हम खेल-कूद कर बड़े हुए। इसके अन्न-जल से हमारा पालन-पोषण होता है। मातृभूमि हमें अपने मातृत्व की छाया में बड़ा करती है और कई प्राकृतिक विपत्तियों से हमारी रक्षा करती है। इसी मातृभूमि पर राम, रहीम, कबीर, कृष्ण, नानक आदि संत-महात्मा पैदा हुए। मातृभूमि ने हमें पेड़-पौधे, पहाड़-नदियां, जड़ी-बूटियां आदि उपहार में दिए हैं। ये सब न होते तो किसी का जीना संभव न होता। इसी मातृभूमि पर ताज महल, लाल किला, सारनाथ, शिमला, मसूरी आदि स्थल है। जिसको देखने पर्यटक दूर देशों से आते हैं और इसकी तारीफों को करते थकते नहीं। हमारी मातृभूमि जीते जी हमें जननी की तरह पालती है और मृत्यु होने के पश्चात वहीं उसके पार्थिक शरीर को अपने अंदर समेट लेती है।  हमें अपनी मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने के लिए हमेशा तैयार रहना चाहिए। WATCH VIDEO  Click Here to Download PPT  मातृभूमि: माँ के समान पर नि...

स्वतंत्रता दिवस पर निबंध | Essay on Independence Day in Hindi | 15 August par Nibandh | 2021

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स्वतंत्रता दिवस पर निबंध भूमिका  स्वतंत्रता संग्राम के अमर सेनानी बाल गंगाधर तिलक ने कहा था कि “ स्वतंत्रता हमारा जन्मसिद्ध अधिकार है। " पशु ,पक्षी ,जीव, जंतु कोई भी पराधीन नहीं रहना चाहता और पराधीन होने पर वह स्वाधीन होने के लिए संघर्ष करता है। इसी प्रकार हमारा देश कई वर्षों तक पराधीन रहा। यहां के वीर स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के त्याग व बलिदान के फल स्वरुप हम 15 अगस्त 1947 को स्वतंत्र हुए। तब से प्रतिवर्ष 15 अगस्त को बड़े हर्षोल्लास के साथ स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते हैं। पृष्ठभूमि  हमारा देश स्वतंत्रता से पूर्व विदेशियों के अधीन था। विदेशी शासक अपने स्वार्थ सिद्धि के लिए भारतीय जनता का शोषण करते थे। जनता के लिए प्रगति के सारे मार्ग बंद हो गये। सारे देश में शिक्षा संस्थाओं का अभाव था जिससे भारत की जनता का मानसिक शोषण भी होता था। इसलिए  भारत की जनता हर दृष्टि से दुखी, अशांत, पीड़ित अभावग्रस्त थी मानो पराधीनता से मुक्ति पाने के लिए छटपटा रही हो। स्वतंत्रता प्राप्ति हमारे नेताओं के अथक प्रयासों से 15 अगस्त 1947 को भारत को पराधीनता से मुक्ति मिल गई। वर्षों से इस ...

रक्षाबंधन पर 10 लाइन | 10 Lines on Raksha Bandhan in Hindi | Raksha Bandhan par 10 Lines ka Nibandh Hindi me | 2021

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रक्षाबंधन पर 10 लाइन भारत पर्वों का देश है। इन पर्वों में रक्षाबंधन एक पवित्र पर्व है। यह पर्व सावन मास की पूर्णिमा को मनाया जाता है। रक्षाबंधन का पर्व भाई- बहन के प्रेम का प्रतीक है। रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाइयों को राखी बाँधती है। रक्षाबंधन के कई दिन पहले से ही बाजार में रंग-बिरंगी राखियों की  दुकानें सज जाती है। भाइयों के दूर होने पर बहनें डाक द्वारा अपनी राखियाँ भेजती है। रक्षाबंधन के उपरांत भाई अपनी बहनों को उपहार देते हैं। रक्षाबंधन के दिन बहनें अपने भाइयों के लिए मंगलकामनाएं करती है। जिन भाइयों की बहने नहीं होती तो वह किसी को धर्म- बहन बनाकर रक्षाबंधन करवाते हैं और बहन का प्रेम एवं सम्मान प्रदान करते हैं। अतः हमें अपने स्वार्थो को त्याग कर पवित्र स्नेह भावना के साथ रक्षाबंधन का पवित्र पर्व मनाना चाहिए। WATCH VIDEO  Click Here to Download PPT  रक्षाबंधन पर निबंध (250 से 300 शब्दों में) | Essay on Raksha Bandhan in Hindi 

राष्ट्रीय पर्व पर निबंध | Essay on National Festival in Hindi | Rashtriya Parv par Nibandh | 2021

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राष्ट्रीय पर्व पर निबंध भूमिका  भारत में मुख्य तीन राष्ट्रीय पर्व मनाए जाते हैं- गणतंत्र दिवस, स्वतंत्रता दिवस और गांधी जयंती। इन्हें सभी भारतीय हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। गणतंत्र दिवस भारत का संविधान 26 जनवरी 1950 को लागू हुआ था, तभी से हम इसे गणतंत्र दिवस के रुप में मनाते हैं। गणतंत्र का राष्ट्रीय पर्व संपूर्ण भारत वर्ष में मनाया जाता है। देश के सभी राज्यों की राजधानियों में, नगरों में, गांव में यह पर्व उल्लास के साथ मनाया जाता है। गणतंत्र दिवस पर्व का मुख्य आयोजन भारत की राजधानी दिल्ली में होता है। इस दिन दिल्ली की शोभा देखते ही बनती है। स्वतंत्रता   दिवस 15 अगस्त 1947 के दिन भारत को आजादी मिली थी और तभी से प्रत्येक वर्ष 15 अगस्त को स्वतंत्रता दिवस के रुप में मनाया जाता है। इसी दिन देश के सभी भागों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है। स्वतंत्रता दिवस उत्सव पर हर साल 21 तोपों को सलामी दी जाती है। यह पर्व हमें राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की प्रेरणा देता है। गांधी जयंती गांधी जी का जन्म 2 अक्टूबर 1869 ई॰ को हुआ था, एक लोकप्रिय नेता होने के नाते गांधी जी को उनकी जयंती पर विशेष रूप...

प्रकृति का प्रकोप:भूकंप पर निबंध | Prakriti ka Prakop par Nibandh | प्रकृति का प्रकोप पर निबंध

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प्रकृति का प्रकोप:भूकंप  पर निबंध भूमिका मनुष्य आदि काल से ही प्राकृति की शक्तियों के साथ संघर्ष करता आ रहा है। उसने अपनी बुद्धि साहस एवं शक्ति के बल पर प्रकृति के अनेक रहस्यों का उद्घाटन करने में सफलता प्राप्त की है, लेकिन इसकी शक्तियों पर पूर्ण अधिकार करने की सामर्थ्य मनुष्य में नहीं। प्रकृति अनेक रूपों में हमारे सामने आती हैं। बाढ़, सूखा, अकाल, आंधी, तूफान भूकंप आदि प्रकृति के विनाशकारी रूपी हैं। भूकंप का अर्थ  भूकंप का अर्थ होता है- पृथ्वी का हिलना। पृथ्वी के गर्भ में किसी प्रकार की हलचल होने के कारण जब धरती का कोई भाग हिलने लगता है या कंपित होने लगता है तो उसे भूकंप की संज्ञा दी गई है। धरती का ऐसा कोई भी भाग नहीं है, जहां कभी न कभी भूकंप के झटके न आए हो। भूकंप के हल्के झटकों से तो विशेष हानि नहीं होती, लेकिन जब कभी जोर के झटके आते हैं तो वे प्रलयकारी दृश्य उपस्थित कर देते हैं। भूकंप क्यों आते हैं ? यह एक ऐसा रहस्य है, जिसका उद्घाटन आज तक नहीं हो सका, वैज्ञानिकों ने प्रकृति को मनुष्य के अनुकूल बनाने के लिए अनेक प्रयत्न किए हैं। वह गर्मी तथा सर्दी से स्वयं को बचाने के लिए व...

वाणी: मन का आईना पर निबंध | Vani man ka aaina par Nibandh hindi me | 2021

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  वाणी: मन का आईना  पर निबंध " ऐसी वाणी बोलिए मन का आपा खोए, औरन को शीतल करें आपहु शीतल होए।"  मनुष्य की वाणी में ऐसी शक्ति होती है, जो एक और तो बड़े-से बड़े दुश्मन का भी दिल जीत सकती है, दूसरी और घनिष्ठ मित्रों को भी अलग कर सकती हैं। वाणी का प्रयोग मनुष्य व्यंग्य करने के लिए भी कर सकता है और हंसने-बोलने के लिए भी। व्यक्ति के संपूर्ण जीवन में उसके बोल ही महत्वपूर्ण होते हैं ।  यदि आपके घर पर मेहमान आए और आपने उनके साथ दो मीठे शब्द न बोले, तो क्या वह दोबारा आपके घर आना पसंद करेंगे? और कहीं आपने मीठे वचन के स्थान पर कड़वे वचन बोल डाले, तब तो परोसे गए तरह-तरह के पकवान भी फीके लगने लगेंगे ।  इतिहास भी इस बात का साक्षी है कि द्रोपदी के कटु वचन ही माहाभारत का कारण बनें। अतः कहां जा सकता है कि वाणी में असीम शक्ति होती है। हमें सदैव मीठी वाणी का प्रयोग करना चाहिए‌। मीठी वाणी हमारे काम को आसान बना देती हैं। जबकि कड़वे वचन हमारे बनते काम को बिगाड़ देखते हैं। कटु वचन का नकारात्मक प्रभाव पड़ता है, जबकि मधुर वाणी का सकारात्मक प्रभाव पड़ता है। एक उदाहरण यह है कि एक प्यास...

विज्ञापन की दुनिया पर निबंध | Essay on Vigyapan ki Duniya in Hindi | 2021

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विज्ञापन की दुनिया  पर निबंध भूमिका  विज्ञापन शब्द 'वि' और 'ज्ञापन' के योग से मिलकर बना है जिसका अर्थ है विशेष रूप से कुछ बताना अर्थात किसी वस्तु के गुणों अतिशयोविपूर्ण वर्णन का दूसरा नाम विज्ञापन है, विज्ञापन समाज एवं व्यापार जगत में होने वाले परिवर्तन को प्रदर्शित करने वाला उद्योग है, जो बदलते समय के ढांचे में तेजी से ढल जाता है। विज्ञापन का भ्रमजाल  आज हमारे चारों और संचार तंत्र का भ्रम जाल-सा बिछा है। एक और हमारे जीवन में पुस्तकें, पत्रिकाएं समाचार पत्र जैसे प्रिंट-मीडिया के साधनों की भरमार है, तो दूसरी ओर हम घर से बाहर तक रेडियों, टेलिविजन, सिनेमा, कंप्यूटर, मोबाइल जैसे इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के अत्याधुनिक साधनों से घिरे हुए हैं। मीडिया के इन सारे साधनों पर सर्वाधिक अधिपत्य विज्ञापन का है। यह न केवल इनकी आय का मुख्य स्रोत है बल्कि पूरे संचार तंत्र पर अपना गहरा प्रभाव छोड़ता है। विज्ञापन के लाभ  विज्ञापन से कई लाभ होते हैं। यह उत्पादों, मूल्यों एवं गुणवत्ता बिक्री संबंधी जानकारियां इत्यादि के बारे में उपयोगी सूचनाएं प्राप्त करने में उपभोक्ताओं की मदद करता है यह नए उ...

स्वाइन-फ़्लू : एक संक्रामक रोग पर निबंध | 2021

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स्वाइन-फ़्लू : एक संक्रामक  रोग  पर निबंध 'एच- एन-।' वायरस से स्वाइन-फ़्लू  आज मनुष्य को जहाँ एक ओर अनेक महामारियों से छुटकारा मिला है, वहीं दूसरी ओर स्वाइन-फ़्लू जैसी भयंकर  महामारी ने हमारे दरवाज़े पर दस्तक दे दी है। इसकी शुरूआत हुई तो थी मेक्सिको से, परंतु अब यह सारे विश्व  में एक महामारी के रूप में फैलता चला जा रहा है।  स्वाइन-फ़्लू सुअरों में होने वाली साँस संबंधी एक संक्रापक बीमारी है, जो प्राय: 'एच-] एन-' वायरस के माध्यम से फैलती है।  स्वाइन-फ़्लू के लक्षण स्वाइन-फ़्लू के लक्षण सामान्य जुकाम बुखार जैसे ही होते हैं। इसमें प्राय100 डिग्री तक बुख़ार जाता है, भूख नहीं लगती, नाक से पानी बहता रहता है। कुछ लोगों के तो गले में भी दर्द होने लगता है। उल्टियाँ भी बहुत होती हैं, डायरिया जैसा हो जाता है। मौसम में परिवर्तन होने के कारण इसका फैलना और भी तेजी से हो जाता है, क्योंकि ऐसे वातावरण में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। स्वाइन-फ़्लू का प्रभाव और भी बढ़ जाता है।  स्वाइन-फ़्लू से बचाव के उपाय डॉक्टरों ने लोगों को इस बात का आश्वासन दिया है कि स्वाइन-...

स्वतंत्रता दिवस पर 10 लाइन | 10 Lines on Independence Day in Hindi | 15 August par 10 Lines | 2021

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स्वतंत्रता दिवस पर 10 लाइन स्वतंत्रता दिवस भारतवर्ष का राष्ट्रीय पर्व हैं। हमारा देश 15 अगस्त 1947 को आजाद हुआ था। हम प्रतिवर्ष 15 अगस्त को बड़े हर्षोल्लास के साथ स्वतंत्रता दिवस के रूप में मनाते हैं। सभी राज्यों की राजधानियों एवं महानगरों में इस दिवस पर विशेष आयोजन होते हैं। इस दिन देश के सभी भागों में राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है। इस दिन सरकारी भवनों को सजाया जाता है। इस दिन दिल्ली में लाल किले पर प्रधानमंत्री द्वारा राष्ट्रीय ध्वज फहराया जाता है। राष्ट्रीय ध्वज को 21 तोपों की सलामी दी जाती है। ध्वजारोहण के उपरांत प्रधानमंत्री राष्ट्र को संबोधित करते हैं। यह पर्व हमें राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की प्रेरणा देता है।   अब हम सब का कर्तव्य है कि हम युगों-युगों तक इसकी रक्षा करते रहें। WATCH VIDEO  Click Here to Download PPT स्वतंत्रता दिवस पर निबंध | Essay on Independence Day in Hindi

सत्संगति पर निबंध | Essay on Satsangati in Hindi | Satsangati par Nibandh | 2021

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सत्संगति पर निबंध भूमिका मनुष्य एक सामाजिक प्राणी हैं। समाज में रहते हुए वह अच्छे - बुरे सभी प्रकार के लोगों के संपर्क में आता हैं। इस प्रकार सारे मनुष्य गुण व दोषों से भरे पड़े हैं। मनुष्य पर गुण व दोषो का प्रभाव  संगति से पड़ता है। सज्जनों की संगति में गुण व दुर्जनों की संगति में दोष ही दोष मिलते हैं। संगति का सभी जीवों पर परस्पर प्रभाव पड़ता है। हवा भी गर्मी में ठंड की संगति पाकर वैसे ही बन जाती है। मानव समाज में लोगों की संगति को  सत्संगति  कहते हैं। सज्जन के लक्षण सभी विद्वान व ग्रंथ सज्जनों की संगति करने को कहते हैं। इसलिए हमें जानना चाहिए कि सज्जनों की क्या पहचान है अर्थात् सज्जन और दुर्जन में क्या अंतर है। सज्जन लोग ज्ञान का भंडार होते हैं। वे सदैव दूसरे के हित में लगे रहते हैं। अपने जीवन को उन्नत बनाने के लिए सदैव परिश्रम पूर्वक सद्कार्यों में जुटे रहते हैं। वे स्वयं सत्य बोलते हैं और अपने निकट आने वाले में भी सत्य का संचार करते हैं। सज्जन लोगों का ह्रदय अत्यंत कोमल होता है। वे दया की मूर्ति होते हैं। वे दूसरों के दुःख में दुःखी व दूसरों के सुख में सुखी होते हैं।...

पुस्तकालय का महत्व पर निबंध | Essay on Importance of Library in Hindi | Pustakalaya ka Mahatva par Nibandh

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पुस्तकालय का महत्व  पर निबंध हमारे जीवन में पुस्तकालय का बड़ा महत्व हैं। पुस्तकालय शब्द 'पुस्तक + आलय'  से मिलकर बना है, जिसका अर्थ है पुस्तकों का घर। हमारे जीवन में पुस्तकों का बड़ा महत्व हैं। जिस प्रकार शरीर की पुष्टि एवं स्वास्थ्य के लिए भोजन की आवश्यकता होती है, इसी प्रकार मस्तिक की पुष्टि के लिए पुस्तकों की आवश्यकता होती हैं। पुस्तकें ज्ञान का भंडार हैं। बड़े-बड़े विद्वान अपना अधिकांश समय पुस्तके पढ़कर ही व्यतीत करते हैं। पुस्तकालय बनाने की प्रथा अत्यंत प्राचीन काल से हैं। राजा - महाराजाओं, ब्रिटिश - शासकों आदि को भी पुस्तकालयों की स्थापना का शौक रहा है। सरकारी एवं गैर सरकारी दोनों क्षेत्र में पुस्तकालय खोले जा रहे हैं। प्रायः सभी विद्यालयों, कॉलेजों एवं विश्वविद्यालयों में पुस्तकालय है। निर्धन छात्रों की मदद के लिए ' बुक - बैंकों ' की भी स्थापना की गई हैं। पुस्तकालय में हमें अनेक प्रकार की पुस्तकें पढ़ने को मिलती हैं। प्रायः सभी विषयों की पुस्तकें अच्छे पुस्तकालयों में मिल जाती हैं। ज्ञान वर्धक एवं मनोरंजक दोनों प्रकार की पुस्तके यहां मिल जाती हैं। विज्ञान - संबं...

प्रकृति का असंतुलन पर निबंध | Essay on Imbalance of Nature in hindi | Prakriti ka asantulan par Nibandh

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प्रकृति का असंतुलन  पर निबंध प्रकृति एवं मनुष्य का अटूट संबंध हैं। प्रकृति ने मानव के सुखी जीवन के लिए अनगिनत सुविधाएं प्रदान की हैं। मनुष्य का सुखी जीवन प्राकृतिक पर्यावरण पर निर्भर करता हैं। मनुष्य की बढ़ती हुई आवश्यकताएं प्रकृति के संतुलन को बिगाड़ रही हैं ।  जब पर्यावरण में दूषित तत्वों की मात्रा आवश्यकता से अधिक बढ़ जाती हैं और आवश्यक तत्वों की कमी हो जाती हैं। तो पर्यावरण प्राणियों के लिए हानिकारक हो जाता हैं। आधुनिक मानव सभ्यता की बढ़ती आवश्यकताओं के कारण प्राकृतिक संतुलन बदल रहा है तथा प्रदूषण बढ़ रहा हैं। मानव की आवासीय, औद्योगिक नागरीकरण, कृषि उत्पादन बढ़ाने की समस्याओं ने प्राकृतिक संतुलन को बिगाड़ कर प्रदूषण को बढ़ाया हैं। यातायात के साधनों ने भी प्रदूषण को बढ़ाया हैं। इसी प्रकार कूड़ा-करकट इधर-उधर फैकने से जल, वायु, भूमि प्रदूषण को बढ़ावा मिला। जोर से संगीत सुनने, हाॅन बजाने से ध्वनि प्रदूषण बढ़ा। इस प्रकार किसी भी प्रकार का प्रदूषण फैलाने में कहीं न कहीं मनुष्य ही जिम्मेदार हैं। जल सभी प्राणियों एवम पेड़ पौधों के लिए जीवन दायक तत्व हैं। इसमें अनेक ...

योग पर 10 लाइन | 10 Lines on Yoga in Hindi | योग पर 10 वाक्य/पंक्तियां

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योग पर 10 लाइन   1. योग  करने से हम अपने स्वास्थ्य की काफी हद तक रक्षा कर सकते हैं।  2. योग एक ऐसी रामबाण दवा है जो दिमाग को शांत और शरीर को स्वस्थ रखता हैं।  3. योग हमारी प्राचीनतम भारतीय संस्कृति की पहचान हैं।  4. योग में ऐसे अनेक आसन है जिन को अपनाने से न केवल कई बीमारियां समाप्त हो जाती है बल्कि कई खतरनाक बीमारियों का प्रभाव भी कम हो जाता हैं।  5. फिट रहने के साथ ही योग हमें सकारात्मक ऊर्जा भी प्रदान करता हैं। 6. योग करने से शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता का विकास होता है।  7. योग हमारे शारीरिक, मानसिक और आत्मिक स्वास्थ्य के लिए लाभदायक हैं।  8. योग छात्र जीवन के लिए भी अत्यंत उपयोगी हैं।  9. छात्र पढ़ाई के साथ-साथ यदि योग को भी अपना ले तो वे अधिक एकाग्र होकर पढाई कर सकेंगे बल्कि उनका स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा।  10.योग करने से छात्र शारीरिक और मानसिक रुप से चुस्त रहेंगे।  अतः हर आयु वर्ग के लोगों को योग अवश्य करना चाहिए। Click Here to Download PPT

मेरा प्यारा भारत पर निबंध | Essay on Mera Pyara Bharat in Hindi | Mera Pyara Bharat par Nibandh | 2021

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  मेरा प्यारा भारत  पर निबंध भूमिका यह मानव की स्वाभाविक प्रवृत्ति है कि वह अपनी जन्मभूमि से अत्यधिक प्यार करता है। कहां है जननी और जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर होती है। भारत हमारी जन्मभूमि है। यह हमारे लिए स्वर्ग से भी बढ़कर है। हमारे देश का नाम भारत है। दुष्यंत और शकुंतला के पुत्र भरत के नाम पर इसका नाम भारत पड़ा। इसका प्राचीन नाम आर्यवर्त भी है। हमारा रोम-रोम इसके प्रति कृतज्ञ हैं। भौगोलिक स्थिति  हमारा भारत एक विशाल देश है। जनसंख्या की दृष्टि से संसार भर में दूसरे स्थान पर है। विभिन्न जातियों के लोग यहां बड़े प्यार से रहते हैं। संसार का सबसे ऊंचा पर्वत शिखर इसी देश में हैं। इस देश की सैकड़ों नदियां इसकी भूमि को हरा-भरा  करती हैं। गंगा यमुना का उपजाऊ मैदान इसी देश में हैं। हर दृष्टि से इस की भौगोलिक स्थिति सर्वश्रेष्ठ है। औद्योगिक विकास  भारत कृषि प्रधान देश है। यह गांव में बसा है। यहां की अधिकांश जनसंख्या कृषि पर निर्भर है। यहां गेहूं, ज्वार, बाजरा, चना, धान, मक्का आदि की फसलें होती हैं। अन्न की दृष्टि से हम स्वावलंबी हैं। वैज्ञानिक प्रगति में भी हम किसी देश ...