सत्संगति पर निबंध | Essay on Satsangati in Hindi | Satsangati par Nibandh | 2021

सत्संगति-पर-निबंध


सत्संगति पर निबंध


भूमिका

मनुष्य एक सामाजिक प्राणी हैं। समाज में रहते हुए वह अच्छे - बुरे सभी प्रकार के लोगों के संपर्क में आता हैं। इस प्रकार सारे मनुष्य गुण व दोषों से भरे पड़े हैं। मनुष्य पर गुण व दोषो का प्रभाव  संगति से पड़ता है। सज्जनों की संगति में गुण व दुर्जनों की संगति में दोष ही दोष मिलते हैं। संगति का सभी जीवों पर परस्पर प्रभाव पड़ता है। हवा भी गर्मी में ठंड की संगति पाकर वैसे ही बन जाती है। मानव समाज में लोगों की संगति को सत्संगति कहते हैं।

सज्जन के लक्षण

सभी विद्वान व ग्रंथ सज्जनों की संगति करने को कहते हैं। इसलिए हमें जानना चाहिए कि सज्जनों की क्या पहचान है अर्थात् सज्जन और दुर्जन में क्या अंतर है। सज्जन लोग ज्ञान का भंडार होते हैं। वे सदैव दूसरे के हित में लगे रहते हैं। अपने जीवन को उन्नत बनाने के लिए सदैव परिश्रम पूर्वक सद्कार्यों में जुटे रहते हैं। वे स्वयं सत्य बोलते हैं और अपने निकट आने वाले में भी सत्य का संचार करते हैं। सज्जन लोगों का ह्रदय अत्यंत कोमल होता है। वे दया की मूर्ति होते हैं। वे दूसरों के दुःख में दुःखी व दूसरों के सुख में सुखी होते हैं। वे दूसरों की सहायता करने के लिए हमेशा तैयार रहते हैं। इसके विपरीत दुर्जन लोगों को दूसरों का अहित करने में आनंद आता है। वे दूसरों के दुःख को देख कर खुश होते हैं। ईष्र्या जलन, क्रोध, छल, कपट उनके प्रमुख गुण होते हैं।

सज्जन लोगों का साथ

सज्जनों की संगति से मनुष्य के जीवन में अमूल परिवर्तन होता हैं। बड़े-बड़े डाकू भी सत्संगति में आकर संत बन जाते हैं। रत्नाकर डाकू वाल्मीकि बन गए। इस प्रकार के कई उदाहरण मिलते हैं जो सत्संगति पाकर एकदम बदल गए। जिनमें सारे अच्छे गुण होते हैं वह सज्जन व्यक्ति होते हैं। विद्यालयों में परिश्रामी, लगनशील, विनम्र व मृदुभाषी बालक सज्जन होते हैं। ऐसे बालक सदैव उन्नति की चरम सीमा को स्पर्श करते हैं। ऐसे छात्रों की जो संगति करता है वह भी उन्हीं की तरह महान बन जाता है। विद्यालय में हर प्रकार के छात्र होते हैं। सज्जन विद्यार्थी सदैव अच्छे अंकों में पास होते हैं और विद्यालय में सबके प्रिय बन जाते हैं।

उपसंहार

प्रत्येक व्यक्ति को अपने हित की बात सोचनी चाहिए। हित हमेशा सत्संगति में होता है। अच्छी संगति में जाकर दुर्जन व्यक्ति भी अच्छा बन जाता है जबकि दुर्जन की सत्संगति में यदि गलती से कोई सज्जन व्यक्ति आ जाता है तो सज्जन व्यक्ति भी फंस जाता है।

अतः मनुष्य के जीवन पर सत्संगति का बहुत प्रभाव पड़ता है ‌।


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